Publiée le 03 sept. 2026 · Nous avons confirmé le 07 sept. 2026 qu'elle est toujours active
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वीडियो शीर्षक: सिर्फ 19 दिन की देरी पर अपील खारिज नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट कुल अवधि: 59 सेकंड फॉर्मेट: वर्टिकल (9:16) टोन: तेज, सटीक और प्रभावशाली 0:00 – 0:08 | हुक (Hook) विजुअल: सुप्रीम कोर्ट का विजुअल, स्क्रीन पर बड़ा और बोल्ड टेक्स्ट: "सिर्फ 19 दिन की देरी और इंसाफ का दरवाजा बंद?" वॉइस-ओवर (VO): "क्या तकनीकी नियमों की वजह से किसी पीड़ित से न्याय का हक छीना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा—बिल्कुल नहीं!" 0:08 – 0:20 | मामला क्या था? (The Background) विजुअल: टेक्स्ट पॉप-अप: उम्मेद देवी बनाम राजस्थान राज्य (2026 INSC 931) | 'दहेज उत्पीड़न का मामला' वॉइस-ओवर (VO): "मामला था दहेज उत्पीड़न और मृत्यु से जुड़ा। निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ जब पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट में अपील की, तो हाईकोर्ट ने इसे केवल इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि अपील में 19 दिन की देरी थी और वकील भी मौजूद नहीं था।" 0:20 – 0:38 | सुप्रीम कोर्ट की दो टूक (SC Observation & Legal Aid) विजुअल: स्क्रीन टेक्स्ट: संवैधानिक अदालतों का कर्तव्य | एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) वॉइस-ओवर (VO): "लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने इसे गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा—अगर अपीलकर्ता का वकील नहीं था, तो अदालत को एमिकस क्यूरी या लीगल एड से वकील देना चाहिए था, न कि केस को तकनीकी आधार पर खारिज करना चाहिए था।" 0:38 – 0:50 | अंतिम फैसला (The Verdict) विजुअल: रेड स्टैंप एनीमेशन: 'हाईकोर्ट का आदेश रद्द' फिर ग्रीन टिक: 'अपील बहाल (Merit-based hearing)' वॉइस-ओवर (VO): "सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए अपील को बहाल कर दिया और निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि गुण-दोष के आधार पर की जाए।" 0:50 – 0:59 | निष्कर्ष व कॉल टू एक्शन (Takeaway & Outro) विजुअल: स्क्रीन पर टेक्स्ट: "प्रक्रिया से ऊपर है न्याय!" | चैनल लोगो / फॉलो बटन वॉइस-ओवर (VO): "साफ संदेश है—संवैधानिक अदालतों का मकसद प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं नहीं, न्याय देना है। ऐसे ही कानूनी अपडेट्स के लिए फॉलो करें!"
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