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AI के साथ बनाया गया
नौकरी बाज़ार 13 अक्टू॰ 2026

भारत के जॉब मार्केट में ठंडक, एंट्री-लेवल भर्तियाँ घटीं, AI की मांग चरम पर

भारत के जॉब मार्केट में ठंडक के साफ संकेत दिख रहे हैं। 2026 की दूसरी तिमाही में जॉब पोस्टिंग 5% घटीं, और करियर की शुरुआत करने वालों के लिए गिरावट और भी तेज रही—एंट्री-लेवल के रिक्त पद 11% कम हुए। जिस देश की कार्यबल में नए ग्रेजुएट्स की लगातार आवक पर निर्भरता है, वहाँ दोहरे अंकों की यह गिरावट एक चेतावनी है, महज उतार-चढ़ाव नहीं।

एंट्री-लेवल भर्तियों में कमी का सबसे ज्यादा असर करियर की सीढ़ी के सबसे निचले पायदान पर पड़ता है। जो कंपनियाँ कभी सपोर्ट रोल, जूनियर इंजीनियरिंग पदों और बैक-ऑफिस काम के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती करती थीं, अब वे इन पदों पर भर्ती रोक रही हैं या घटा रही हैं। ऑटोमेशन और लागत में कटौती इसकी एक वजह है, लेकिन कंपनियों का अपनी ग्रोथ योजनाओं को फिर से परखते हुए रुककर इंतजार करने का रुख भी इसमें शामिल है। छात्रों और नए ग्रेजुएट्स के लिए संदेश सीधा है: पारंपरिक पहली नौकरी मिलना मुश्किल होता जा रहा है, और हर रिक्त पद के लिए मुकाबला तेज हो रहा है।

इसी दौर में AI स्किल्स की मांग फट पड़ी है। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और उद्योगों में भर्तियाँ कमजोर पड़ने के बावजूद वैश्विक स्तर पर AI से जुड़ी जॉब पोस्टिंग 60% बढ़ीं। यही अंतर मौजूदा बाजार की सबसे बड़ी पहचान है। नियोक्ता पूरी भर्ती नहीं रोक रहे, बल्कि उसे दूसरी जगह लगा रहे हैं। AI सिस्टम बनाने, तैनात करने या संभालने वाली भूमिकाओं की मांग तेज है, जबकि नियमित और आसानी से ऑटोमेट हो सकने वाले काम पीछे धकेले जा रहे हैं।

नौकरी खोजने वालों के लिए यह वह समय है जब अनुकूलन करने वालों को फायदा मिलता है। सिर्फ एक सामान्य डिग्री अब दरवाजा खटखटाने की गारंटी नहीं है। जो उम्मीदवार व्यावहारिक AI जानकारी—भले बुनियादी स्तर पर—के साथ समस्या-समाधान और संवाद जैसे सॉफ्ट स्किल्स दिखा सकते हैं, वे आगे निकलेंगे। अपस्किलिंग अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि एंट्री की कीमत है। जो लोग बाजार के पुराने ढाँचे में लौटने का इंतजार करेंगे, उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

एक ढाँचागत चुनौती भी है जिसे भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता। देश हर साल लाखों ग्रेजुएट तैयार करता है, और सिकुड़ता एंट्री-लेवल बाजार स्किल की असंगति को पूरी रोजगार संकट में बदल सकता है। नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों को कॉलेजों में पढ़ाए जाने और नियोक्ताओं की मौजूदा जरूरतों के बीच का फासला पाटना होगा। छोटे बूटकैंप और उद्योग के साथ साझेदारी मदद कर सकते हैं, पर वे गहरे पाठ्यक्रम सुधार का विकल्प नहीं हैं।

कुल तस्वीर ढहने की नहीं, बल्कि पुनर्आवंटन की है। कुल पोस्टिंग मामूली रूप से घटी हैं, लेकिन उनका मिश्रण तय तौर पर AI से जुड़े काम की ओर खिसक रहा है। नौकरी खोजने वालों के लिए निष्कर्ष साफ है: मौके अब भी हैं, पर वे जगह बदल रहे हैं। उनका पीछा करने के लिए सोची-समझी मेहनत, लगातार सीखना और दिशा बदलने की तैयारी चाहिए। दूसरा रास्ता—पुरानी एंट्री-लेवल भर्ती का दरवाजा फिर खुलने का इंतजार—ऐसा दांव है जो बहुत कम लोग उठा सकते हैं।

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open_in_new स्रोत: www.msn.com