U.S. National Science Foundation
विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र (STC) एकीकृत साझेदारी कार्यक्रम उन शोध और शिक्षा परियोजनाओं को मदद देता है जो बेहद नवाचारी और जटिल होती हैं और जिनके लिए बड़े पैमाने पर लंबे समय तक चलने वाला अनुदान जरूरी होता है। इन केंद्रों का लक्ष्य नए वैज्ञानिक ढांचे रचना, पूरी तरह नई वैज्ञानिक विधाएं खड़ी करना और ऐसी परिवर्तनकारी तकनीकें विकसित करना है जिनका असर विज्ञान या समाज पर व्यापक रूप से पड़ सके।
ये केंद्र उच्च शिक्षा संस्थानों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, औद्योगिक संगठनों तथा अन्य सार्वजनिक या निजी संस्थाओं के बीच साझेदारी से और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए विश्वस्तरीय शोध करते हैं। इसी ढांचे के चलते विषयों के संगम पर संभावित तौर पर नए रास्ते खोलने वाली खोजें की जा सकती हैं, या किसी एक विषय के भीतर अत्यंत नवाचारी तरीके अपनाए जा सकते हैं। इन केंद्रों में विज्ञान और इंजीनियरिंग का कोई भी ऐसा क्षेत्र शामिल हो सकता है जिसे NSF सहयोग देता है।
STC में निवेश NSF की उस सोच को आगे बढ़ाता है जिसमें विज्ञान और इंजीनियरिंग में नई अवधारणाएं गढ़ी और इस्तेमाल की जाएं तथा शोध और शिक्षा में वैश्विक नेतृत्व मिले। ये केंद्र ऐसा समृद्ध माहौल बनाते हैं जहां भावी वैज्ञानिक, इंजीनियर और शिक्षक जोखिम लेकर खोज और नए ज्ञान की राह पर चल सकें।
केंद्र शिक्षा और शोध को आपस में जोड़कर तथा सीखने और जिज्ञासा के बीच सेतु बनाकर शिक्षा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं, ताकि खोज और रचनात्मकता सीखने की प्रक्रिया को पूरी तरह सहारा दे सकें। NSF की अपेक्षा है कि STC में हर स्तर पर — फैकल्टी, स्टाफ, छात्रों और पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ताओं — ऐसे समूहों के लोग शामिल हों जो विज्ञान और इंजीनियरिंग में परंपरागत रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले रहे हैं, और केंद्र STEM में भागीदारी बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
STEM में जिनका प्रतिनिधित्व कम रह सकता है उनमें महिलाएं, दिव्यांग व्यक्ति, अश्वेत और अफ्रीकी अमेरिकी, हिस्पैनिक और लातीनी, अमेरिकी इंडियन, अलास्का मूल निवासी, हवाई मूल निवासी तथा अन्य प्रशांत द्वीपवासी शामिल हैं। इन नस्लीय और जातीय श्रेणियों के नाम अमेरिकी सरकार के संघीय सांख्यिकी और प्रशासनिक रिपोर्टिंग दिशानिर्देश (OMB सांख्यिकी नीति निर्देश संख्या 15, संघीय सांख्यिकी और प्रशासनिक रिपोर्टिंग के लिए नस्ल और जातीयता मानक) से लिए गए हैं।
हालांकि ये सामाजिक पहचानें अलग-अलग गिनाई गई हैं, पर ये एक-दूसरे से कटी हुई नहीं हैं, और STC केंद्र के भीतर विविधता, समानता तथा समावेशन की योजना बनाते समय इनमें से एक या अधिक पहचानों के मेल पर विचार करना पड़ सकता है। केंद्र अपने यहां सभी लोगों की भर्ती, टिकाऊपन, सफलता और करियर में आगे बढ़ने जैसे मुद्दों से निपटने के लिए संबंधित साहित्य पर आधारित सिद्ध तरीके अपना सकते हैं या नए-नए उपाय भी।
केंद्रों को ज्ञान हस्तांतरण यानी वैज्ञानिक और तकनीकी सूचना के आदान-प्रदान की गतिविधियां भी करनी होती हैं, जिसका मकसद कई क्षेत्रों में ज्ञान को व्यापक रूप से फैलाना और उसका उपयोग करना है। ज्ञान हस्तांतरण के उदाहरणों में तकनीक हस्तांतरण, नीति-निर्माताओं तक अहम सूचना पहुंचाना, या ज्ञान को एक विज्ञान क्षेत्र से दूसरे में फैलाना शामिल है।
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